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Navratri 2026 Live Updates: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा और आरती

 Written By: Naveen Khantwal
 Updated : Mar 18, 2026 11:56 pm IST

Navratri 2026 Live Updates: चैत्र नवरात्रि के 9 दिनों में माता दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। सबसे पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा होती हैं जो मां दुर्गा का पहला स्वरूप हैं। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजन विधि और मंत्र, कथा आदि के बारे में।

Chaitra Navratri 2026- India TV Hindi
चैत्र नवरात्रि 2026 Image Source : FREEPIK

Navratri 2026 Live Updates: नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है। माता शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। माता शैलपुत्री स्थिरता और शक्ति का प्रतीक हैं। माता की पूजा करने से भक्तों के जीवन में भी स्थिरता आती है। माता का पूजन आपके मूलाधार चक्र को भी जागृत करता है और जीवन में अच्छे बदलाव आपको देखने को मिलते हैं। आइए ऐसे में अब जान लेते हैं कि नवरात्रि के पहले दिन माता दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा कैसे करनी है और किन मंत्रों का जप करने से आपको लाभ मिलेगा। 

माता शैलपुत्री की पूजा विधि और पूजन मुहूर्त 

नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू हो जाएगा और पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा होगी। माता की पूजा के लिए 19 मार्च की सुबह 06:28 मिनट से 07:55 मिनट तक का समय सबसे शुभ रहेगा। इसी दौरान कलश स्थापना भी की जाएगी। 

पूजा विधि

  1. मां शैलपुत्री की पूजा करने के लिए आपको सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। इसके बाद स्नान-ध्यान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। 
  2. माता को श्वेत वस्त्र अति प्रिय हैं इसलिए नवरात्रि के पहले दिन सफेद कपड़े पहनकर आपको माता की पूजा करनी चाहिए। सफेद वस्त्र न हों तो पीले वस्त्र भी आप धारण कर सकते हैं। 
  3. इसके बाद आपको गंगाजल से पूजा स्थल को स्वच्छ करना चाहिए और घट स्थापित करना चाहिए। 
  4. घटस्थापना के साथ ही नवरात्रि के व्रत का संकल्प भी आपको लेना चाहिए। फिर पूजा स्थल पर धूप-दीप जला लें।
  5. संकल्प लेने का बाद माता शैलपुत्री की पूजा शुरू करें।
  6. माता को सिंदूर, अक्षत, सफेद फूल, दूध या घी से बना मिष्ठान आदि आपको अर्पित करना चाहिए। 
  7. पूजा के दौरान माता के मंत्र, कथा आदि का पाठ भी अवश्य करें। 
  8. पूजा के अंत में माता शैलपुत्री की आरती का पाठ अवश्य करें। 

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  • 11:56 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: माता शैलपुत्री का प्रार्थना मंत्र

    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए नीचे दिए गए प्रार्थना मंत्र का जप अवश्य करें। 

    मंत्र- वन्दे वांच्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

  • 11:48 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri: नवरात्रि के पहले दिन की पूजा सामग्री

    • कलश  
    • मिट्टी का पात्र 
    • जौ 
    • अक्षत
    • कलावा
    • घी का दीपक
    • मिट्टी (जौ बोने के लिए) 
    • आम के पत्ते
    • नारियल चुनरी के साथ 
    • रोली/सिंदूर 
    • कपूर 
    • अगरबत्ती
    • फूल-माला
    • फल
    • सफेद मिठाई 
  • 11:33 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के पहले दिन करें लौंग और कपूर का ये उपाय

    नवरात्रि के पहले दिन 2 लौंग और एक कपूर को जलाकर पूरे घर में इसका धुआं दिखाएं। ऐसा करने से घर में सकारात्मकता आएगी और वैवाहिक और करियर के क्षेत्र में आपको शुभ फलों की प्राप्ति आएगी। 

  • 11:20 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री की पूजा में न करें ये गलतियां

    • काले या नीले रंग के वस्त्र न पहनें। 
    • माता को दूर्वा या घास अर्पित न करें। 
    • अखंड ज्योति जलाने वाले हैं तो घटस्थापना से पहले न जलाएं। 
    • पहले दिन का व्रत खत्म होने के बाद लहसुन-प्याज से बना भोजन न खाएं। 
    • माता शैलपुत्री को बासी फल या भोग अर्पित न करें। 
  • 10:45 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के दौरान मंदिर में लौंग का दान करने के लाभ

    नवरात्रि के दौरान अगर आप मंदिर में लौंग का दान करते हैं तो माता दुर्गा की कृपा के साथ ही आपके कष्ट भी दूर होते हैं। राहु केतु से जुड़े बुरे प्रभावों से भी आपको मुक्ति मिलती है। 

  • 10:26 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri Upay: नवरात्रि के पहले दिन करें ये 1 उपाय, मनोकामनाएं होंगी पूरी

    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए आपको एक पान के पत्ते में 21 लौंग रखकर मां को अर्पित करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता को प्रसन्न करता है और मां आपकी मनोकामनाएं पूरी कर सकती हैं। 

  • 10:00 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के पहले दिन इन चीजों का दान करना शुभ?

    नवरात्रि के पहले दिन सुहाग की सामग्री, लाल चुनरी, सफेद मिठाइयां, सफेद वस्त्र दान करने से माता शैलपुत्री की कृपा आपको प्राप्त होती है। 

  • 9:46 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: माता शैलपुत्री का बीज मंत्र क्या है?

    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा के दौरान आपको माता के बीज मंत्र 'ॐ ह्रीं शिवायै नम:' का जब भी अवश्य करना चाहिए। इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करने से आपको मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही इस मंत्र का जप करने से मां शैलपुत्री की असीम कृपा भी आप पर बरसती है। 

  • 9:17 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री के इस मंत्र का करें 108 बार जप, पूरी होंगी मनोकामनाएं

    नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री के नीचे दिए गए मंत्र का आपको 108 बार जप करने से जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होगी और साथ ही आपको मनोकामनाएं भी पूरी हो सकती हैं। 

    मंत्र-

    वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
    वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

  • 8:40 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन करें इस कवच का पाठ

    ओमकार: मेंशिर: पातुमूलाधार निवासिनी।
    हींकार: पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥

    श्रींकारपातुवदने लावाण्या महेश्वरी ।
    हुंकार पातु हदयं तारिणी शक्ति स्वघृत।

    फट्कार पात सर्वागे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥

  • 8:27 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के नौ दिनों में करें दुर्गा चालीसा का पाठ

    श्री दुर्गा चालीसा 

    नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
    नमो नमो अंबे दुःख हरनी ॥ 1 ॥

    निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
    तिहू लोक फैली उजियारी ॥ 2 ॥

    शशि ललाट मुख महाविशाला ।
    नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ 3 ॥

    रूप मातु को अधिक सुहावे ।
    दरश करत जन अति सुख पावे ॥ 4 ॥

    तुम संसार शक्ति लय कीना ।
    पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ 5 ॥

    अन्नपूर्णा हुयि जग पाला ।
    तुम ही आदि सुंदरी बाला ॥ 6 ॥

    प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
    तुम गौरी शिव शंकर प्यारी ॥ 7 ॥

    शिव योगी तुम्हरे गुण गावेम् ।
    ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावेम् ॥ 8 ॥

    रूप सरस्वती का तुम धारा ।
    दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥ 9 ॥

    धरा रूप नरसिंह को अंबा ।
    परगट भयि फाड के खंबा ॥ 10 ॥

    रक्षा कर प्रह्लाद बचायो ।
    हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥ 11 ॥

    लक्ष्मी रूप धरो जग माहीम् ।
    श्री नारायण अंग समाहीम् ॥ 12 ॥

    क्षीरसिंधु में करत विलासा ।
    दयासिंधु दीजै मन आसा ॥ 13 ॥

    हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
    महिमा अमित न जात बखानी ॥ 14 ॥

    मातंगी धूमावति माता ।
    भुवनेश्वरी बगला सुखदाता ॥ 15 ॥

    श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
    छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ 16 ॥

    केहरि वाहन सोह भवानी ।
    लांगुर वीर चलत अगवानी ॥ 17 ॥

    कर में खप्पर खडग विराजे ।
    जाको देख काल डर भाजे ॥ 18 ॥

    तोहे कर में अस्त्र त्रिशूला ।
    जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥ 19 ॥

    नगरकोटि में तुम्हीं विराजत ।
    तिहुँ लोक में डंका बाजत ॥ 20 ॥

    शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे ।
    रक्तबीज शंखन संहारे ॥ 21 ॥

    महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
    जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ 22 ॥

    रूप कराल कालिका धारा ।
    सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥ 23 ॥

    पडी भीढ संतन पर जब जब ।
    भयि सहाय मातु तुम तब तब ॥ 24 ॥

    अमरपुरी अरु बासव लोका ।
    तब महिमा सब कहें अशोका ॥ 25 ॥

    ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
    तुम्हें सदा पूजें नर नारी ॥ 26 ॥

    प्रेम भक्ति से जो यश गावेम् ।
    दुःख दारिद्र निकट नहिं आवेम् ॥ 27 ॥

    ध्यावे तुम्हें जो नर मन लायि ।
    जन्म मरण ते सौं छुट जायि ॥ 28 ॥

    जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
    योग न होयि बिन शक्ति तुम्हारी ॥ 29 ॥

    शंकर आचारज तप कीनो ।
    काम अरु क्रोध जीत सब लीनो ॥ 30 ॥

    निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।
    काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥ 31 ॥

    शक्ति रूप को मरम न पायो ।
    शक्ति गयी तब मन पछतायो ॥ 32 ॥

    शरणागत हुयि कीर्ति बखानी ।
    जय जय जय जगदंब भवानी ॥ 33 ॥

    भयि प्रसन्न आदि जगदंबा ।
    दयि शक्ति नहिं कीन विलंबा ॥ 34 ॥

    मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
    तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥ 35 ॥

    आशा तृष्णा निपट सतावेम् ।
    रिपु मूरख मॊहि अति दर पावैम् ॥ 36 ॥

    शत्रु नाश कीजै महारानी ।
    सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥ 37 ॥

    करो कृपा हे मातु दयाला ।
    ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला । 38 ॥

    जब लगि जियू दया फल पावू ।
    तुम्हरो यश मैं सदा सुनावू ॥ 39 ॥

    दुर्गा चालीसा जो गावै ।
    सब सुख भोग परमपद पावै ॥ 40 ॥

  • 8:13 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री की पूजा से दूर करें चंद्र दोष

    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माता की पूजा से चंद्र दोष से भी मुक्ति मिलती है। नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री को सफेद फूल चढ़ाकर अगर आप शैलपुत्री के मंत्रों का जप करते हैं तो चंद्रमा कुंडली में मजबूत होते हैं और चंद्रमा से जुड़ी सभी परेशानियों का अंत हो जाता है। 

  • 8:04 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: मां शैलपुत्री का स्वरूप कैसा है?

    मां शैलपुत्री सौम्य और करुणामयी हैं। इनके दाएं हाथ में त्रिशुल है वहीं बायीं भुजा में कमल सुशोभित है। माता का वाहन वृषभ यानि बैल है। माता के मस्तक पर अर्ध चंद्रमा विराजमान है जिसे ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। 

  • 7:51 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    मां शैलपुत्री को कौन सा पुष्प अर्पित करें?

    मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए चमेली, गुड़हल आदि के फूल आप अर्पित कर सकते हैं। इन पुष्पों को माता को अर्पित करने से आपको जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। 

  • 7:34 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: माता शैलपुत्री की साधना से कौन सा चक्र जागृत होता है?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता शैलपुत्री की पूजा करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है। इस चक्र के जागृत होने से जीवन में संतुलन और ठहराव आता है और साथ ही मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। 

  • 7:19 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: माता शैलपुत्री को किन चीजों का भोग लगाएं ?

    • माता शैलपुत्री को सफेद चीजों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। 
    • देसी घी का भोग माता को लगाने से निरोगी काया प्राप्त होती है। 
    • गाय के दूध से बनी खीर भी माता को अतिप्रिय है। 
    • माता को मलाई, मावे की मिठाई का भोग भी लगा सकते हैं। 
    • मखाने की खीर भी मां शैलपुत्री को अर्पित करना शुभ माना जाता है। 
  • 7:08 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Maa Shailputri Ki Katha: माता शैलपुत्री की कथा

    माता शैलपुत्री को नवदुर्गा में प्रथम स्थान प्राप्त है। माता शैलपुत्री पूर्व जन्म में दक्ष की पुत्री सती थीं।  वहीं अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय के घर में जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री नाम मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रजापति दक्ष ने एक बार एक यज्ञ करवाया था और इसमें शिव-सती को निमंत्रण नहीं दिया। इसके बावजूद भी माता सती भगवान शिव के ना करने के बावजूद भी अपने पिता दक्ष के यज्ञ में पहुंच गई। जहां प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के सामने ही भगवान शिव को तिरस्कृत करना शुरू कर दिया। पिता का यह व्यवहार देखकर माता सती ने यज्ञ कुंड में ही दाह संस्कार कर दिया। 

    इसके बाद क्रोध में आए भगवान शिव ने दक्ष के इस यज्ञ को ध्वस्त कर दिया। माता सती ने ही अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय के घर में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाईं। शैलपुत्री माता का विवाह भगवान शिव से हुआ था। माता शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के पहले दिन करने से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं और साथ ही वैवाहिक जीवन में भी अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।  

  • 6:52 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: मां शैलपुत्री की आरती

    मां शैलपुत्री की आरती
    शैलपुत्री मां बैल असवार।
    करें देवता जय जयकार॥ 
    शिव शंकर की प्रिय भवानी।
    तेरी महिमा किसी ने ना जानी॥
    पार्वती तू उमा कहलावे।
    जो तुझे सिमरे सो सुख पावे॥ 
    ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
    दया करे धनवान करे तू॥
    सोमवार को शिव संग प्यारी।
    आरती तेरी जिसने उतारी॥ 
    उसकी सगरी आस पुजा दो।
    सगरे दुख तकलीफ मिला दो॥
    घी का सुंदर दीप जला के।
    गोला गरी का भोग लगा के॥ 
    श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
    प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं॥
    जय गिरिराज किशोरी अंबे।
    शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे॥ 
    मनोकामना पूर्ण कर दो।
    भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो॥ 

  • 6:38 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन इन मंत्रों से करें मां शैलपुत्री को प्रसन्न

    • ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
    • वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
    • या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    • ह्रीं शिवायै नमः।।
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